Deepak Saraswat, a good person along with a good director
दीपक सारस्वत एक अच्छे निर्देशक के साथ ही एक अच्छे इंसान भी है.
मुंबई जब बाढ़ के कहर से गुजरने लगती है तब तमाम समाजसेवक और संस्थाए मदद के लिए आगे आती है. पर सच्चाई ये है की ऐसी आपदा को कई तो पब्लिसिटी स्टंट की तरह इस्तेमाल करते है तो कई राजनैतिक फायदे के लिए।
पर एक सख्श जिसने २ दिन अपनी टीम के साथ मिल कर बिना किसी शोर शराबे के अँधेरी स्टेशन पर मुश्किल में फॅसे राहगीरों के लिए फरिस्ते जैसा काम किया. इस काम का न कोई शोर था, न ही कोई पब्लिसिटी। चलिए जानते है इस सख्श के बारे में -
एक छोटे शहर से आकर मायानगरी मुंबई में अपनी कला का अलख जगाने वाले 'दीपक सारस्वत' आज किसी परिचय का मोहताज नहीं
२०११ से अपना फिल्मी करियर शुरू करने के साथ अपनी किस्मत को संघर्ष से पछाड़ने वाले दीपक सारस्वत ने आज तमाम छेत्रो में अपनी उपलब्धियो का लोहा मनवाया है. वह एक अच्छे लेखक, कवि और निर्देशक तो है ही, साथ ...
